सूरदास, रसखान, रहीम, बनारसी दास, नज़ीर, ग़ालिब, मीर, जैसे मशहूर साहित्यकार आगरा की ही देन हैं. अबुल फज़ल, तानसेन, गंग कवि, इब्नेबतूता, ह्वेनसांग आदि के इतिहास और रचनाएँ आगरा में ही रची गयी हैं.
बाबरनामा, आइने अकबरी, तुजुके जहाँगीरी और बादशाहनामा जैसी आगरा और भारत के इतिहास को बयां करने वाली प्रमुख पुस्तकें यहीं रची गयी हैं.
संस्कृत महाकाव्य रामायण और महाभारत का प्रथम हिंदी अनुवाद आगरा में ही हुआ तथा यहीं से प्रकाशित भी हुआ है.
डा. रामविलास शर्मा, डा. रांगेय राघव, बलबीर सिंह रंग जैसे साहित्य के शीर्ष पुरुष आगरा की ही मिटटी में पल्लवित पुष्प हैं.
क्या आप जानते हैं कि प्रथम 'तार सप्तक' के प्रकाशन के समय उसमें प्रकाशित सात कवियों में से ५ उस समय आगरा में ही थे?
Thursday, 10 September 2009
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